लिंक्डइन ने AI-जनित कंटेंट की बाढ़ पर लगाई लगाम: नए रिपोर्टिंग टूल और नीतिगत बदलाव लागू

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लिंक्डइन ने AI-जनित कंटेंट की बाढ़ पर लगाई लगाम: नए रिपोर्टिंग टूल और नीतिगत बदलाव लागू

पेशेवर सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा तैयार की गई सामग्री की बढ़ती बाढ़ के कारण एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित पोस्ट का एक बड़ा हिस्सा अब AI द्वारा बनाया जा रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए, लिंक्डइन नए टूल पेश कर रहा है, जिनमें उपयोगकर्ता रिपोर्टिंग बटन और उन्नत स्वचालित पहचान क्षमताएं शामिल हैं। इसके साथ ही, यह प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता और उपयोगकर्ता अनुभव को बनाए रखने के लिए अपनी AI-संचालित लेखन सहायता सुविधाओं में भी बदलाव कर रहा है।

AI-जनित सामग्री का उदय और लिंक्डइन की चिंताएं

एआई साहित्यिक चोरी डिटेक्टर 'पैनग्राम' की हालिया रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच लिंक्डइन पर प्रकाशित 41% लंबी पोस्ट और 30% टिप्पणियाँ पूरी तरह से एआई द्वारा तैयार की गई थीं। विशेषज्ञों की सामग्री के क्षेत्र में यह प्रवृत्ति विशेष रूप से हावी है, जहाँ एआई का उपयोग ऐसी सामग्री का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए किया जा रहा है जिसे 'थिंकफ्लुएंसिंग' के रूप में जाना जाता है।

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लिंक्डइन ने चिंता व्यक्त की है कि एआई-जनित सामग्री का यह प्रसार प्लेटफॉर्म के मूल मूल्यों को कमजोर कर सकता है, जो वास्तविक लोगों को जोड़ने और वास्तविक अंतर्दृष्टि साझा करने पर आधारित हैं। कंपनी का मानना है कि यह स्थिति उपयोगकर्ताओं की वास्तविक व्यक्तियों के साथ बातचीत करने और प्रामाणिक अनुभव तथा ज्ञान प्राप्त करने की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफल रहती है, जिसके परिणामस्वरूप प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता और उपयोगकर्ता अनुभव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए लिंक्डइन के उपाय

इस मुद्दे से निपटने के लिए, लिंक्डइन ने ठोस उपायों की घोषणा की है। लिंक्डइन के मुख्य उत्पाद अधिकारी (सीपीओ) हरि श्रीनिवासन ने जोर देकर कहा, "एआई स्लोप हम सभी के लिए एक प्राथमिकता है।" उन्होंने कहा कि लोग वास्तविक व्यक्तियों से जुड़ने और प्रामाणिक दृष्टिकोण व विचार साझा करने के लिए लिंक्डइन पर आते हैं। नतीजतन, लिंक्डइन ने एक 'यह AI स्लोप जैसा लगता है' ('Seems like AI slop') बटन पेश किया है, जिससे उपयोगकर्ता उन पोस्ट की सीधे रिपोर्ट कर सकते हैं जिन पर उन्हें AI-जनित होने का संदेह है।

जब किसी पोस्ट की रिपोर्ट की जाती है, तो उसके निर्माता को एक 'सूचना' मिलेगी। लिंक्डइन उन उपयोगकर्ताओं को निजी तौर पर सूचित करने का परीक्षण करने की योजना बना रहा है जिनकी पोस्ट एआई स्लोप रिपोर्टिंग बटन को ट्रिगर करती हैं। श्रीनिवासन ने समझाया कि यह दृष्टिकोण इस विचार पर आधारित है कि एआई और 'स्लोप' अलग-अलग हैं, और एआई का उपयोग करके अपने विचारों को निखारने वाले उपयोगकर्ता जानना चाहते हैं कि क्या उनकी सामग्री अप्राकृतिक लगती है। इसके अतिरिक्त, लिंक्डइन एआई स्लोप और अन्य निम्न-गुणवत्ता वाली सामग्री की पहचान करने के लिए एक नई स्वचालित वर्गीकरण प्रणाली लागू कर रहा है, ताकि इसे फैलने से पहले सिफारिश फ़ीड से हटाया जा सके।

AI उपयोग नीतियों और उद्योग के रुझानों में बदलाव

लिंक्डइन ने अपनी मौजूदा एआई कार्यात्मकताओं में भी संशोधन किया है। 'अपनी पोस्ट को बेहतर बनाएं' ('Enhance your post') सुविधा, जो पहले उपयोगकर्ता की पोस्ट को फिर से लिखने के लिए बड़े भाषा मॉडल (LLMs) का उपयोग करती थी, अब बंद कर दी गई है। इसे एक ऐसी सुविधा से बदला जाएगा जो उपयोगकर्ता की मूल 'आवाज़' को बदले बिना वर्तनी और व्याकरण को सही करेगी। लिंक्डइन ने कहा कि वह सभी एआई सुविधाओं को नहीं हटाएगा, यह स्वीकार करते हुए कि उपयोगकर्ता एआई के साथ पोस्ट को परिष्कृत करते समय अधिक आत्मविश्वास महसूस करते हैं।

एआई-जनित सामग्री का यह मुद्दा केवल लिंक्डइन तक ही सीमित नहीं है। यूट्यूब और फेसबुक जैसे अन्य प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पाठ-आधारित प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से, एआई-जनित छवियों या वीडियो की तुलना में एआई-जनित पाठ सामग्री का पता लगाना अधिक कठिन पाते हैं। सबस्टैक ने पैनग्राम के एआई-विरोधी टूल अपनाए हैं, और डिग को अपनी प्लेटफॉर्म पर बॉट्स द्वारा एआई-जनित सामग्री भरने से रोकने में विफल रहने के बाद एक बड़े पुनर्गठन का सामना करना पड़ा। ये उदाहरण एआई-जनित सामग्री के खिलाफ सक्रिय उपाय लागू करने की प्लेटफार्मों की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं ताकि वास्तविक उपयोगकर्ता जुड़ाव और सामग्री की गुणवत्ता बनी रहे।

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